देहरादून। आगामी विधानसभा चुनाव के ऐन समय भाजपा को गहरा झटका लगा है। भाजपा के कद्दावर नेता रामशरण नौटियाल ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया हैं। रामशरण नौटियाल ने कुछ दिन पहले ही भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में सोमवार को रामशरण नौटियाल कांग्रेस में शामिल हुए।
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने रामशरण नौटियाल को देहरादून जिले की चकराता विधानसभा सीट से टिकट भी दिया था, लेकिन वो कांग्रेस प्रत्याशी प्रीतम सिंह से हार गए थे। वहीं सोमवार को दिल्ली में रामशरण नौटियाल की ज्वाइनिंग के दौरान उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा के अलावा प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के अलावा उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य भी मौजूद रहे। रामशरण नौटियाल उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं।
पूरे देश में लोकतंत्र की धज्जियां उड़ रही हैं। चुनाव आयोग पर सवाल खड़े हो रहे हैं और श्री राहुल गांधी जी लगातार ‘वोट चोरी’ पर बात रख रहे हैं।
SIR पर सिर्फ विपक्ष, जनता, श्री राहुल गांधी जी ने सवाल नहीं उठाए बल्कि दो चुनाव आयुक्तों ने भी आपत्ति दर्ज कराई। आज तानाशाही का माहौल है और देश में तानाशाह सरकार है।
दिल्ली में INDIA गठबंधन ने चुनाव आयोग के दफ्तर जाने की कोशिश की, लेकिन हमें चीफ इलेक्शन कमिश्नर से मिलने नहीं दिया गया।
INDIA गठबंधन के सांसदों ने राष्ट्रपति जी से मुलाकात करने का प्रयास किया, लेकिन सिर्फ दस लोगों का डेलिगेशन ही उनसे मिल पाया और बाकी सांसदों को विजय चौक पर ही रोक दिया गया।
दिल्ली
— Kumari Selja (@Kumari_Selja) October 19, 2026
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राज्य गठन के शुरुआती दौर में वह देहरादून जिला पंचायत के अध्यक्ष रह चुके हैं। जिला पंचायत की राजनीति से अपनी पहचान बनाने वाले नौटियाल ने बाद में विधानसभा चुनाव में भी किस्मत आजमाई। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें चकराता सीट से उम्मीदवार बनाया था। इस सीट पर उनका मुकाबला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह से हुआ।
चुनाव में रामशरण नौटियाल को 27,417 वोट मिले, जबकि प्रीतम सिंह को 36,853 वोट हासिल हुए। इस तरह नौटियाल 9,436 वोटों से चुनाव हार गए. चकराता क्षेत्र में प्रीतम सिंह की मजबूत राजनीतिक पकड़ के बीच भाजपा ने नौटियाल को मैदान में उतारकर मुकाबले को चुनौतीपूर्ण बनाने की कोशिश की थी. हालांकि, वह जीत हासिल नहीं कर सके।
अब कांग्रेस में उनकी वापसी के बाद यह देखना अहम होगा कि पार्टी उनके पुराने राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में संपर्कों का इस्तेमाल किस तरह करती है।रामशरण नौटियाल का भाजपा से अलग होने का फैसला भी चर्चा में रहा। पार्टी छोड़ने से पहले उन्होंने संगठन में उचित सम्मान नहीं मिलने और सार्वजनिक मंचों पर अपमानित किए जाने जैसी शिकायतें उठाई थीं। उनकी नाराजगी को पार्टी में अपनी भूमिका और योगदान को लेकर असंतोष से जोड़कर देखा गया।
लंबे समय तक भाजपा में रहने और पार्टी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ने के बाद उनका इस्तीफा देना संगठन के लिए सवाल खड़े करता है। अब कांग्रेस में शामिल होने के बाद भाजपा के साथ उनके रिश्तों और पार्टी छोड़ने की वजहों पर एक बार फिर चर्चा हो रही है। हालांकि, उनके इस्तीफे के कारणों को लेकर उनकी ओर से कही गई बातों और भाजपा के पक्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है।
उनके कांग्रेस में आने से विपक्ष को भाजपा के भीतर असंतोष का मुद्दा उठाने का अवसर जरूर मिला है, लेकिन इसका सीधा चुनावी असर कितना होगा, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी। रामशरण नौटियाल की पहचान देशभर में मशहूर गायक जुबिन नौटियाल के पिता के रूप में भी है। जुबिन ने अपनी गायकी के दम पर संगीत की दुनिया में खास मुकाम हासिल किया है, लेकिन उनके पिता की अपनी अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि रही है।
रामशरण नौटियाल जिला पंचायत की राजनीति से लेकर विधानसभा चुनाव तक सक्रिय रहे हैं और उत्तराखंड की राजनीति में उनका पुराना अनुभव रहा है। ऐसे में उनके कांग्रेस में शामिल होने को केवल उनके पारिवारिक परिचय के आधार पर देखना सही नहीं होगा। उनकी राजनीतिक उपयोगिता का आकलन उनके संगठनात्मक अनुभव, स्थानीय संपर्कों और क्षेत्र में प्रभाव के आधार पर किया जाएगा।
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