Home Uttarakhand Kumaon …क्या राहुल गांधी व महेंद्र भट्ट की होगी गिरफ्तारी?

…क्या राहुल गांधी व महेंद्र भट्ट की होगी गिरफ्तारी?

…क्या राहुल गांधी व महेंद्र भट्ट की होगी गिरफ्तारी?

हल्द्वानी/नैनीताल। हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद कथित तौर पर किए गए ‘शुद्धिकरण’ को लेकर चल रहे विवाद में अब उत्तराखण्ड पुलिस ने भी भारी दबाव के बीच मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले में हल्द्वानी कोतवाली पुलिस ने अधिवक्ता एवं कांग्रेस कार्यकर्ता अंजू की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 196 और 299 के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(आर) के तहत मामला दर्ज किया है।

इस मामले में अब तक तीन मुकदमें दर्ज हो चुके हैं। पहली एफआईआर हल्द्वानी में राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज की गई थी, उसके बाद बेंगलुरु के विधान सौध थाने में भी उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट समेत कुछ लोगों के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज हुई है, अब हल्द्वानी में कथित ‘शुद्धिकरण’ करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। बड़ा सवाल यह है कि क्या, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी और उत्तराखण्ड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट गिरफ्तार होंगे?

दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की जनसभा को संबोधित किया था। इसके बाद उसी मैदान में कथित तौर पर हवन और ‘शुद्धिकरण’ किए जाने का वीडियो और तस्वीरें सामने आईं। कांग्रेस ने इसे दलित समाज और खरगे के अपमान से जोड़ते हुए कड़ा विरोध जताया और आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे को राज्य सभा में उठाया, तो नेता सदन जेपी नड्डा ने जांच और कार्यवाई का आशवासन दिया। राहुल गांधी ने इस पर दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस की, उनपर हल्द्वानी में एफआईआर हुई तो मामला तूल पकड़ गया, देश भर में कांग्रेस ने इस मुद्दे पर धरना-प्रदर्शन किये। सोमवार को देहरादून में सीएम आवास का घेराव किया गया। विवाद बढ़ने के बाद कांग्रेस ने पुलिस और प्रशासन से शिकायत कर एफआईआर दर्ज करने की मांग की। मामला इतना तूल पकड़ गया कि इसे लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दाखिल की गई।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने अदालत को बताया कि 30 अगस्त 2026 को हल्द्वानी थाने में एफआईआर संख्या 0297/2026 दर्ज की जा चुकी है। सरकार ने अदालत को यह भी भरोसा दिलाया कि मामले की जांच कानून के मुताबिक निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और घटनाक्रम से जुड़े सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाएगा। सरकार की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि बेंगलुरु में दर्ज एक जीरो एफआईआर को जांच के लिए हल्द्वानी स्थानांतरित किए जाने की संभावना है।

सरकार की ओर से एफआईआर दर्ज होने और जांच का भरोसा दिए जाने के बाद हाईकोर्ट ने मामले में तत्काल अतिरिक्त न्यायिक निर्देश देने के बजाय याचिका का निस्तारण कर दिया। अदालत ने पुलिस को कानून के अनुसार मामले की जांच करने की बात कही।

इस विवाद में बेंगलुरु के विधान सौध थाने में भी उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट समेत कुछ लोगों के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। शिकायत में हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम का आरोप लगाया गया था। वहीं, इस पूरे विवाद के बीच हल्द्वानी में राहुल गांधी के खिलाफ भी अलग एफआईआर दर्ज है। यानी विवाद अब दोनों पक्षों की शिकायतों और कानूनी कार्रवाई तक पहुंच चुका है।

हल्द्वानी पुलिस के सामने अब सबसे अहम सवाल यह है कि कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम में कौन-कौन लोग शामिल थे, कार्यक्रम किसकी अनुमति या पहल पर हुआ और पूरे
घटनाक्रम का वास्तविक स्वरूप क्या था। सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला औपचारिक पुलिस जांच के चरण में है।

उत्तराखण्ड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के हल्द्वानी दौरे के बाद ‘शुद्धीकरण’ का मामला सामने आया, जिससे देवभूमि के देवतुल्य जनमानस की भावनाएं आहत हुईं। जगह-जगह शिकायतों के बाद आज पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह एफआईआर कानून की जीत है, कांग्रेस के लाखों कार्यकर्ताओं की जीत है और देवभूमि के जनमानस की जीत है।

उन्होने कहा कि, मैं मुख्यमंत्री धामी से पूछना चाहता हूँ अगर आप इस मामले को जातीय ध्रुवीकरण की ओर ले जाना चाहते हैं, तो अंकिता भंडारी की जाति क्या थी? श्रीनगर की ममता बहुगुणा की जाति क्या थी? ऊधम सिंह नगर में पुलिस की बेरहमी के कारण आत्महत्या करने वाले किसान की जाति क्या थी? मुख्यमंत्री जी, हमारी नजर में इनकी एक ही पहचान थी वे देवभूमि के पुत्र-पुत्रियां और उत्तराखंड के नागरिक थे।

यह मामला किसी व्यक्ति विशेष से द्वेष का नहीं, बल्कि कानून के राज और प्रदेश की गरिमा का है। दलित चेतना के प्रतीक हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का अपमान सभ्य समाज स्वीकार नहीं कर सकता। कांग्रेस का स्पष्ट संदेश है समाज न बंटे, देश और प्रदेश कमजोर न हों और कानून का राज स्थापित हो।