Home Uttarakhand Dehradun अपराधों से दहला उत्तराखंड, सरकार बेबस : कांग्रेस

अपराधों से दहला उत्तराखंड, सरकार बेबस : कांग्रेस

अपराधों से दहला उत्तराखंड, सरकार बेबस : कांग्रेस

देहरादून। प्रदेश में लगातार हो रही दिनदहाड़े हत्याओं, महिला अपराधों और बढ़ती आपराधिक घटनाओं ने उत्तराखंड को झकझोर कर रख दिया है, जिसको लेकर उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने धामी सरकार पर जमकर निशाना साधा है।

शुक्रवार को कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में पत्रकारों से बातचीत में गोदियाल ने कहा प्रदेश की अस्थायी राजधानी देहरादून में जिस तरह से विकासनगर, ऋषिकेश, मच्छी बाजार, सिल्वर सिटी और तिब्बती मार्केट में एक के बाद एक हत्याएं हुईं, वह बताती हैं कि कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।

गोदियाल ने कहा कि प्रदेश की कानून व्यवस्था पर मुख्यमंत्री का अब कोई कंट्रोल नहीं रहा, क्योंकि उनकी दिलचस्पी सिर्फ और सिर्फ भ्रष्टाचार करने में है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यह कितनी हैरत की बात है कि तिब्बती मार्केट में एक नौजवान की हत्या कर दी जाती है उसके बावजूद
मुख्यमंत्री और उनकी पूरी कैबिनेट बगल की एक पिक्चर हॉल में 3 घंटे की पिक्चर देखते हैं जिसके परिणाम स्वरूप आज देहरादून में एक और हत्या को अंजाम दे दिया गया यह बताता है कि मुख्यमंत्री राज्य में हो रहे अपराधों के प्रति कितने गंभीर हैं।

आज प्रदेश में कानून का राज ध्वस्त हो चुका है, लेकिन मुख्यमंत्री को नफरत फैलाने से फुरसत नहीं है। मुख्यमंत्री का आज एक ही काम रह गया है खुद काले कारनामे करो और काले कपड़े विरोधी पार्टी को पहना दो। लेकिन ये अब नहीं चलेगा।

गोदयाल ने यह भी कहा कि पुलिस प्रशासन के द्वारा बताया जा रहा है कि सिल्वर सिटी में जिस व्यक्ति की हत्या की गई है वह झारखंड का रहने वाला है और उसके ऊपर पहले से 50 मुकदमे चल रहे हैं ऐसे में मुख्यमंत्री बताएं कि आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों को बिना जांच पड़ताल के उनकी सरकार ने यहां खनन का पट्टा किस आधार पर दिया?

गोदियाल ने कहा कि जिस व्यक्ति की हत्या हुई है उसका उसके तार खनन व्यापार से जुड़ते हुए बताए जा रहे हैं धामी सरकार बताएं कि बाहरी लोगों को उत्तराखंड की आबो हवा खराब करने के लिए और संसाधन लूटने के लिए क्यों प्राथमिकता दे रही है?

गोदियाल ने बताया कि एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड से हर साल 1200 से अधिक बच्चे लापता हो रहे हैं। महिला अपराध के मामलों में उत्तराखंड हिमालयी राज्यों में चिंताजनक स्थिति में पहुंच चुका है। सवाल यह है कि क्या अपराधियों में कानून का कोई भय शेष रह गया है?