Thursday, November 5, 2026
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जैनी प्रकरणः महिला ने वीडियो जारी कर कहा, आज करूंगी खुलासा

जैनी प्रकरणः महिला ने वीडियो जारी कर कहा, आज करूंगी खुलासा

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर 23 साल पुराना जैनी प्रकरण सुर्खियों के केंद्र में आ गया है। जिस मामले ने वर्ष 2003 में तत्कालीन नारायण दत्त तिवारी सरकार को हिलाकर रख दिया था, अब उसी प्रकरण में खुद जैनी के सामने आने के ऐलान ने प्रदेश की सियासत में हलचल तेज कर दी है। इस बार मामला केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उस महिला ने भी अपनी चुप्पी तोड़ने का संकेत दे दिया है, जिसके नाम पर पिछले कई दिनों से राजनीतिक बयानबाजी हो रही है।

बुधवार को सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में खुद को जैनी बताने वाली महिला ने नेताओं को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि उनके बारे में अनर्गल बातें की जा रही हैं और उन पर तरह-तरह के लांछन लगाए जा रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि उनके साथ 2003 में क्या हुआ था, यह उन्हें अच्छी तरह मालूम है और वह जल्द ही पूरी बात प्रमाणों के साथ सार्वजनिक करेंगी।

वायरल वीडियो में एक महिला खुद को जेनी बता रही है। वह कह रही है कि ‘आप लोगों ने गंदगी मचा रखी है, राजनीति कर रहे हैं मेरे नाम को लेकर… मेरे साथ क्या हुआ, क्या नहीं हुआ, किसी ने नहीं पूछा। आज इतने वर्षों के बाद लांछन लगा रहे हैं। तो रही बात मेरे साथ किसने क्या किया, क्या नहीं किया वो मुझे ही पता है।

विद प्रूफ मैं आप लोगों के सामने आऊंगी। जो भी है, मेरे साथ जो हुआ था 2003 में या उस बीच में, जो भी हुआ मैं आप लोगों को बताऊंगी। लेकिन अभी मेरे बारे में जो भी आप लोग बातें कर रहे हो, उसका डीएनए करो… इसका डीएनए कराओ… आप लोग कौन होते हैं?  मुझे बस एक दिन का टाइम दीजिए। सबूत के साथ सामने आऊंगी।

इस बयान ने भाजपा और कांग्रेस दोनों खेमों में हलचल बढ़ा दी है। अब सबकी निगाहें उनके अगले बयान और उन कथित प्रमाणों पर टिकी हैं, जिन्हें सामने लाने की बात उन्होंने कही है।

दरअसल, अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर कांग्रेस की ओर से निकाली गई न्याय यात्रा के बाद उत्तराखंड की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस राजनीतिक बहस के दौरान कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत को 2003 के जैनी प्रकरण की याद दिलाई।

इसके बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने भी इस मामले को लेकर हरक सिंह रावत पर सवाल उठाए। भट्ट ने पूछा कि जैनी के बच्चे का पिता कौन था और इतने वर्षों बाद भी इस सवाल का जवाब सार्वजनिक क्यों नहीं हुआ?

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के सवालों पर हरक सिंह रावत ने भी तीखा पलटवार किया है, उन्होंने कहा कि उनका डीएनए टेस्ट हो चुका है और वह इस मामले में बेदाग हैं। हरक ने कहा कि मुझ पर आरोप लगाने से पहले भट्ट जवाब दें कि जब वे विधायक थे, तब नंदप्रयाग-घाट में स्थानीय जनता ने उनकी जूते-चप्पलों से पिटाई क्यों की थी? आखिर ऐसी कौन सी हरकत थी कि जनता को उनके खिलाफ इस तरह सड़क पर उतरना पड़ा? जैनी प्रकरण में मेरी सीबीआई और डीएनए जांच हो चुकी है, जिसमें मैं निर्दाेष पाया गया। न्यायालय से भी मुझे क्लीन चिट मिली। इसके बावजूद महेंद्र भट्ट बिना तथ्यों को समझे अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं।

जैनी प्रकरण की शुरुआत वर्ष 2003 में हुई थी। उस समय उत्तराखंड में नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी और हरक सिंह रावत राजस्व मंत्री थे। असम मूल की इंदिरा देवी उर्फ जैनी ने 15 जून 2003 को देहरादून के सरकारी अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया था। इसके बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ और बच्चे के पितृत्व को लेकर तत्कालीन मंत्री हरक सिंह रावत का नाम सामने आया।

18 जून 2003 को यह मुद्दा उत्तरांचल विधानसभा में भी गूंजा। विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया और मामले की जांच की मांग उठाई। राजनीतिक दबाव के बीच हरक सिंह रावत ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। बाद में जैनी की शिकायत और उनके बयानों के आधार पर सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की। जुलाई 2003 में सीबीआई ने दुष्कर्म के आरोपों के संबंध में मामला दर्ज किया था।

हरक सिंह रावत ने आरोपों से इनकार किया। बाद के वर्षों में जांच और डीएनए रिपोर्ट को लेकर भी राजनीतिक बहस होती रही। हरक सिंह रावत का पक्ष रहा है कि जांच में वह निर्दाेष साबित हुए। वर्ष 2016 में भी इस प्रकरण ने फिर सुर्खियां बटोरी थीं, जब जैनी की ओर से तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत और उनके सहयोगियों को लेकर आरोप लगाए जाने की खबरें सामने आई थीं।

बुधवार को सामने आए वीडियो में महिला ने कहा है कि वह अगले दिन यानी पांच नवंबर को अपने साथ हुई घटना का खुलासा करेंगी और प्रमाणों के साथ अपनी बात रखेंगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जैनी 23 साल पुराने इस मामले के उन पहलुओं को सामने लाएंगी, जो अब तक सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा नहीं बन पाए हैं? क्या वह अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज, जांच से जुड़े रिकॉर्ड या अन्य प्रमाण पेश करेंगी? और क्या उनके खुलासे से भाजपा-कांग्रेस के बीच चल रही राजनीतिक जंग को नया मोड़ मिलेगा?